
जौनपुर की नौवीं की छात्रा के मौत मामले में 3 महीने के बाद भी दोषियों की नहीं हुई गिरफ्तारी, आक्रोश
■ दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए हाइकोर्ट में दाखिल हो रही है फेयर इन्वेस्टिगेशन याचिका- अधिवक्ता शरदेंदु सौरभ
अलीम उद्दीन
प्रयागराज। जौनपुर जिले के ग्यासपुर स्थित बालिका विद्यालय में नौवीं कक्षा की छात्रा रूबी की संदेहास्पद स्थिति में मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति राममनोहर नारायण मिश्र की फटकार के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज हुई थी। खंडपीठ ने गोविंद निषाद की याचिका पर अधिवक्ता जयशंकर मिश्र एवं शरदेंदु मिश्र को सुनकर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। छात्रा के मौत मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब 3 महीने के बाद भी दोषियों की नहीं गिरफ्तारी है। दोषियों की गिरफ्तारी न होने से प्रशासन की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है ! दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय में फेयर इन्वेस्टिगेशन की याचिका दाखिल हों रहीं है।
बतातें चलें कि याचिका के अनुसार नौवीं कक्षा की छात्रा गत दो जुलाई को जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय ग्यासपुर में पढ़ने गई थी। स्कूल पहुंचने के लगभग साढ़े तीन घंटे बाद परिजनों के पास स्कूल के प्रधानाचार्य का फोन आता है कि आपकी बच्ची की मौत हो गई है। सूचना पाकर स्कूल पहुंचे परिजनों ने देखा कि छात्रा के शव को सील कर पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था। परिजनों ने स्कूल प्रशासन व अधिकारियों से शव को देखने की प्रार्थना लेकिन सबने अनसुना कर दिया। परिजनों का आरोप है कि शव का पंचनामा पर भी जबरन उनके हस्ताक्षर कराए गए। पूरे घटनाक्रम के निष्पक्ष जांच के लिए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष फेयर इन्वेस्टिगेशन याचिका दाखिल हो रहीं है। याचीगण के अधिवक्ता शरदेंदु सौरभ का कहना हैं कि उन्हें माननीय उच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा हैं कि जल्द इसमें दोषियों की गिरफ़्तारी सुनिश्चित होगी। लीगल एसोसिएट स्वाती चतुर्वेदी का कहना हैं कि यह घटना नारी शक्ति को लेकर सरकार के दावों पर प्रश्न खड़े करती हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस त्रिपाठी, राजीव कुमार पांडेय, अनिल शास्त्री , उदय सिंह , कृष्ण कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर विभव मिश्र, ऋषभ मिश्र , बीएचयू के सलिल दुबे सबने एक स्वर में माननीय उच्च न्यायालय पर आस्था और विश्वास जताया है और कहा है कि इसपर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद का ऐतिहासिक फैसला आयेगा।






