Home राज्य लोकतंत्र की असली चाबी मतदाता के हाथ में-समाजसेवी 

लोकतंत्र की असली चाबी मतदाता के हाथ में-समाजसेवी 

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प्रयागराज।अक्सर कहा जाता है कि लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन है। लेकिन इस परिभाषा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी वह जागरूक मतदाता है, जो चुनावी शोर शराबे के बीच अपने विवेक की आवाज सुनता है| लोकतंत्र की भव्य इमारत ईट पत्थरों से नहीं, बल्कि हमारे द्वारा सही ढंग से चुने गए प्रतिनिधियों के चरित्र से बनती है।चुनाव के समय अक्सर हम लहरों और नारों के पीछे बह जाते हैं| लेकिन एक जागरूक मतदाता वह है जो मुफ्त के वादों और तत्कालीन लाभ के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर सवाल पूछता है| जब हम जाति धर्म या क्षेत्र के संकीर्ण चश्मे को उतारकर राष्ट्र प्रथम की दृष्टि से वोट देते हैं तभी लोकतंत्र वास्तव मे मजबूत होता है।हमें समझना होगा कि जब मतदाता जागरूक होता है, तो सत्ता में बैठे लोगों को पता होता है कि उनकी हर गतिविधि पर जनता की पैनी नजर है| यह डर ही सुशासन को जन्म देता है।

विचार कीजिए, आपका एक सही वोट गलत नीतियों के खिलाफ सबसे बड़ा शांतिपूर्ण हथियार है।और यह भी सही है कि हमारा एक वोट केवल 5 साल के लिए प्रतिनिधि नहीं चुनता, बल्कि हमारी आने वाली पीढियां के भविष्य की दिशा तय करता है।इसलिए समझिए कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी सेवा नहीं बल्कि उसके नागरिकों का विवेकपूर्ण मतदान है।एक सजक मतदाता का कर्तव्य सिर्फ उंगली पर स्याही लगवाना ही जिम्मेदारी नहीं है| असली जिम्मेदारी मतदान से पहले शुरू होती है:वोट देने से पहले उम्मीदवार के बैकग्राउंड और उसके पिछले कार्यों की जांच करें| घोषणापत्र को ध्यान से पढ़ें और उसकी व्यावहारिकता समझे| सिर्फ दूसरों के कहने पर नहीं बल्कि अपनी तार्किक समझ के आधार पर निर्णय ले।अंततः कहना है कि लोकतंत्र कोई ऐसी मशीन नहीं है जो खुद ब खुद चलती रहे ,इसे चलाने के लिए जन भागीदारी के ईंधन की जरूरत होती है |अगर हम आज उदासीन रहेंगे, तो कल हमें शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं होगा| याद रखें ,आपका वोट आपकी चुप्पी तोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।आइए, इस बार सिर्फ एक संख्या न बने, बल्कि एक जागरूक प्रहरी बने। क्योंकि एक जागरूक मतदाता ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।

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