▪️ करोड़ों की भूमि पर भूमाफियाओं ने दबंगई के दम पर कर रखा है कब्जा

स्थानी पुलिस ने किया निरोधात्मक, कार्रवाई एसीपी को पता नहीं ?

आर. के. त्रिपाठी

प्रयागराज। सोरांव तहसील के अन्तर्गत नगर पंचायत मऊआइमा गाटा संख्या 3586, 4920, 4922, पर मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है | विवादित भूमि को प्रशासन ने शत्रु संपत्ति घोषित कर रखा है | खाली पड़ी भूमि पर भूमाफियाओं ने मिलीभगत के चलते फर्जी दस्तावेज बनाकर भूमि का क्रय विक्रय भी कर रखा है । स्थानी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भले ही निरोधात्मक करवाई कर दिया परंतु सहायक पुलिस आयुक्त को इसकी भनक तक नहीं है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि मामला रेवेन्यू से सम्बंधित है।
सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रीय लेखपाल की नाकामी के चलते भूमि विवाद बढ़ता ही जा रहा है। लेखपाल ने विवादित भूमि को पहले शत्रु संपत्ति कहकर भूमि के कुछ अंश पर बुलडोजर चलवा कर खाली कराया था। पुनःउसी विवादित भूमि पर कई लोगों के पक्ष में फर्जी रिपोर्ट बनाकर शत्रु संपत्ति का ही कई लोगों को मलिक बना दिया। भूमि के अलग-अलग अंश को पहले भी कई लोगों ने अपने नाम बैनामार करा रखा है। राजस्व की रिपोर्ट के आधार पर खुद को जमीन का मालिक समझ कर अलग-अलग लोगों ने विवादित भूमि को अलग-अलग लोगों से बेच दिया है। भूमाफियाओं का एक चर्चित गिरहों सक्रिय है जो मिलीभगत के चलते शत्रु संपत्ति पर ही कब्जा कर चुका है जिसको प्लाटिंग करके बेचने का षड्यंत्र भी चल रहा है।
शत्रु संपत्ति के अलग-अलग अंश को अपना बात कर कई लोगों ने रजिस्टर्ड बैनामा भी कर रखा है। बड़े बुजुर्गों से बात करने पर जानकारी मिली के विवादित भूमि के असली मालिक विभाजन के दौर मे पाकिस्तान जा चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त आदेश है कि भू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण या कब्जे को तत्काल खाली कराया जाए सीएम के आदेश का असर प्रयागराज में भी दिखाई दे रहा है लेकिन मऊआइमा में भूमाफियाओं ने शत्रु संपत्ति पर ही कब्जा कर रखा है। ऐसे ना जाने कितनी सरकारी संपत्ति तालाब कब्रिस्तान है जो भू माफिया ने प्लाटिंग करके बेच भी दिया गया है । बीते कुछ वर्षों से लगातार शिकायत की जाती रही है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही की गई है । जिससे भूमाफियाओं का मनोबल दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।
प्रकरण में स्थानीय पुलिस ने शांति भंग होने की स्थिति को देखते हुए भू- माफियाओं के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 126/135 के कार्रवाई करके अपनी पीठ थपथपा रही है।
बतातें चलें कि सोरांव तहसील में केई बीघे शत्रु संपत्ति को बेचा जा रहा है। भू- माफियाओं का दावा किया है कि जमीन के दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं। सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि मऊआइमा टाउन एरिया में शत्रु संपत्ति के दस्तावेज जला दिए गए हैं, लेकिन 70 साल पुराने अभिलेखों के आधार पर इस मामले में जांच कराई जा सकती है। उल्लेखनीय है कि शत्रु संपत्ति वह संपत्ति है जो देश के बंटवारे के बाद जो लोग अपनी संपत्ति भारत में छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। उसे सरकार ने बाद में शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। सरकार ने 1967 में शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया और ऐसी जमीनों का संरक्षक प्रदेश सरकार को बना दिया गया था, लेकिन समय के साथ बड़ी संख्या में भू माफियाओं ने शत्रु संपत्तियों पर कब्जा कर लिया। मऊआइमा में 1983 में हुए दंगे में राजस्व के सभी दस्तावेज जला दिए गए थे। ऐसे में शत्रु संपत्ति के दस्तावेज भी नहीं बचे। आरोप है कि तत्कालीन राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से लगभग 35 बीघा जमीन जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। दबंग माफियाओं ने उसे अपने नाम दर्ज करा लिया है। इलाके के कुछ बुजुर्ग लोगों से बातचीत की गई तो पता चला कि करीब 35 बीघा जमीन भू माफियाओं ने कब्जा कर ली है। इस पूरे मामले में एक खास गिरोह का नाम सामने आ रहा है जो जमीन से नाम हटवाने के लिए लोगों पर दबाव बना रहा है। प्रकरण में प्रशासन ने शांति भंग होने की स्थिति को देखते हुए भू- माफियाओं के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 126/135 के कार्रवाई करके भू- माफियाओं को पाबंद किया है। जिससे भू- माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

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