Home राज्य उत्तर प्रदेश झगरा बरिया नदी उफान पर कई गांवों का टूटा संपर्क मार्ग

झगरा बरिया नदी उफान पर कई गांवों का टूटा संपर्क मार्ग

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मूसलाधार बारिश व बाढ़ ने मचाई तबाही जन-जीवन अस्त-व्यस्त

राजदेव द्विवेदी

प्रयागराज। जनपद के यमुनानगर बारा क्षेत्र में लगभग 12 घंटे से हो रही लगातार बारिश ने इलाकों में कोहराम मचा दिया है। क्षेत्र के गांवों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। जगह-जगह जल भराव की स्थिति बन गई है खेतों से लेकर घरों तक पानी ही पानी नजर आ रहा है। झगरा बरिया नदी इस समय उफान पर है, जिससे आसपास के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। इस स्थिति से स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि झगरा बरिया नदी प्रयागराज के तहसील बारा क्षेत्र से बहती है। बारा तहसील प्रयागराज जिले की आठ तहसीलों में से एक है, जिसमें जसरा और शंकरगढ़ विकासखंड शामिल है और कुल 326 गांव है, बारा क्षेत्र में यमुना नदी भी बहती है जो एक प्रमुख नदी है। यमुना नदी में ही झगरा बरिया नदी तरहार क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में समाहित होती है। ऐसे में दो नदियों की बाढ़ से पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया है लोगों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। तहसील मुख्यालय के पास से रिगवां लालापुर संपर्क मार्ग झगरा बरिया नदी की बाढ़ से धरा, सोनवै, डांडी, ओढगी, गिधार, लालापुर ,प्रतापपुर ,पंडुआ सेमरी तरहार ,भिलोर ,महेरा , अमिलिया आदि नदी के बाढ़ की चपेट में आ जाने से कई गांव का संपर्क मार्ग बाधित हो गया है। जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरा चौराहे से लगभग 500 मीटर की दूरी पर झगरा बरिया नदी पड़ती है जिसका जल स्तर बढ़ जाने की वजह से उपरोक्त गांवों का संपर्क मार्ग बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थाई पुलिया का निर्माण नहीं होने की वजह से आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधि चुनाव के समय बड़ी-बड़ी लच्छेदार बातें कह कर वोट तो हासिल कर लेते हैं मगर चुनावी समय निकलने के बाद लोग गुनगुनाने पर मजबूर हैं की वादे हैं वादों का क्या? ग्रामीणों ने शासन प्रशासन व जन प्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट करवाते हुए मांग की है कि पुलिया का निर्माण अति शीघ्र करवाया जाए जिससे हम ग्रामीणों को समस्या से निजात मिल सके। किसानों के मुताबिक रोपाई के बाद जैसे ही फसलें जमने लगी थी वैसे ही मूसलाधार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि धान की फसलें खेतों में सड़ने लगी हैं। जिससे ग्रामीण अंचलों में गहरा संकट खड़ा हो गया है, जहां एक ओर किसान फसल बर्बादी से मायूस है, वहीं नदी का जलस्तर बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। गांवों की सड़कों पर जल भराव से लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य मार्गो से लेकर गलियों तक पानी भरा हुआ है इससे ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल व जरूरी कार्यों के लिए निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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