पंचायत चुनाव की आहट होते ही प्रधानी पद के दावेदार वोटरों को लुभाने में जुटे

ग्रामीणों की जुबानी प्रधानों की कहानी, विकास की उम्मीदें और वास्तविकता

प्रयागराज।पंचायत चुनाव की आहट होते ही प्रधानी पद के दावेदार सक्रिय हो गए हैं और वे वोटरों को लुभाने में जुट गए हैं। विभिन्न दावेदार अपने-अपने तरीके से वोटरों को आकर्षित करने और उन्हें अपनी ओर करने के प्रयास कर रहे हैं।दावेदारों द्वारा वोटरों को लुभाने के लिए विभिन्न रणनीतियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें वादों, घोषणाओं, और प्रत्यक्ष संपर्क शामिल हैं। कुछ दावेदार वोटरों को आकर्षित करने के लिए स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रहे हैं, जबकि अन्य अपने विकास के एजेंडे को प्रस्तुत कर रहे हैं,और चुनावी रणनीतियों को अमल में ला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।
ग्रामीणों की जुबानी,प्रधानों की कहानी
एक दिलचस्प और वास्तविक चित्र प्रस्तुत करती है। गांव की गलियों की खाक छानते हुए विद्रोही सामना टीम ने ग्रामीणों से बातचीत की और जाना कि वे अपने प्रधानों के बारे में क्या सोचते हैं। वही ग्रामीणों का कहना था कि प्रधानों से उन्हें विकास की उम्मीदें होती हैं, लेकिन कई बार वास्तविकता अलग होती है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके समस्याओं को सुनते हैं, जबकि कुछ अन्य ने कहा कि उनके प्रधान केवल अपने हितों को देखते हैं। इस खबर के माध्यम से हम ग्रामीणों की जुबानी और प्रधानों की कहानी को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और नेतृत्व की वास्तविकता क्या है।
कांवड़ियों की सेवा में जुटे प्रधान पद के दावेदार
हमारे टीम का कारवां आगे बढ़ा तो कुछ अलग दृश्य देखने को मिला,होने वाले पंचायत चुनाव की सर गर्मी ने कावड़ यात्रा का जोश हाई कर दिया है। भावी प्रधान पद के दावेदार लगातार कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं। कावड़ यात्रा में कांवड़ियों को भेजने में भी यह लोग बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। प्रधान और प्रधानी के दावेदारों में कावड़ यात्रा भेजने की होड़ से दिखाई दी। कांवड़ियों को जल भरने और मनकामेश्वर धाम लालापुर देवाधिदेव महादेव को जलाभिषेक करने अपने खर्चे पर भेज रहे हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि यह प्रधान पद के संभावित उम्मीदवार हैं जो अपने खर्चे पर कावड़ियों को पुण्य लाभ करवा रहे हैं।
पंचायत चुनाव से पहले अजब गजब के दिख रहे रंग
पंचायत चुनाव से पहले अजब गजब के रंग दिख रहे हैं, भावी उम्मीदवार विजय श्री के लिए हर तरीका अपना रहे हैं। कोई भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहता। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई पार्टी कर रहा है कोई आर्थिक मदद को आगे आ रहा है। यही नहीं कुछ भावी उम्मीदवार पवित्र सावन के महीने के नाम पर वोटरों के घरों में फल, मिठाई, नमकीन और खाद्य सामग्री का पैकेट तक पहुंचा रहे हैं। अगर उनके घर में कोई बीमार है तो अपने खर्चे पर अस्पताल तक पहुंचाने और दवाई दिलाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
क्षेत्र के मतदाताओं ने भी भावी प्रत्याशियों को टोपी पहनाने की लगाई जुगत
क्षेत्र के कुछ मतदाताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि किसी एक भावी प्रत्याशी को ही नहीं सभी भावी प्रत्याशियों को हम लोग टोपी पहनाने में लगे हुए हैं। सभी को भरपूर भरोसा देकर सम्मानित भावी प्रत्याशियों से बीमारी के नाम के साथ ही साथ दोस्तों के लिए गरमा गरम मसालेदार के साथ बोतल भी मांगने से परहेज नहीं कर रहे हैं। हाला कि कुछ ग्रामीण वोटरों ने यह भी कहा कि उक्त लॉलीपॉप से हम लोग बदलेंगे नहीं आने वाले वक्त में वोट उसी को करेंगे जो गांव का विकास करने योग्य होगा। ना पहले वाला भारत है ना हम पहले वाले वोटर
बहरवाल यह नजारा कुछ ही गांवों में देखने को मिल रहा है। अब यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, मगर इन दिनों भावी उम्मीदवार मतदाताओं की खूब खातिरदारी कर रहे हैं। बहरहाल हमारी टीम इन मुद्दों पर नजर रख रही है आने वाले चुनावी समय में देखेंगे की चुनावी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और स्थानीय प्रशासन इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। अगले अंक में फिर विद्रोही सामना टीम गांव के गलियों में भ्रमण कर लोगों के विचारों से मुखातिब होगी। ग्रामीणों की जुबानी प्रधानों की कहानी के अगले अंक को लेकर समाचार पत्र के माध्यम से क्षेत्रीय जनों तक पहुंचाने का भरसक प्रयत्न करेंगे।

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