आदिमानव के जीवन काल की झलक थी पंडाल की अनोखी थीम्स
आदिमानव के जीवन काल की यात्रा रही पंडाल की अनोखी प्रस्तुति
सृष्टि पाठक
प्रयागराज। विजयदशमी के अवसर पर भक्तों में नम आंखों के साथ में आदिशक्ति को विदा किया। शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों के अनुष्ठान के बाद जब माता की विदाई की बेला आई तो मां से दूर होने का गम कमोबेश हर भक्तों के आंखों से स्पष्ट झलक रही थी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने काफी मायूसी के साथ सुख समृद्धि और निरोग रहने की कामना करते हुए माता को विदा किया। जा रही मैया दर्शन कर लो–आदि तमाम भक्ति गीतों के बीच मां को विसर्जित किया गया।गाजे बाजे के साथ रंग गुलाल उड़ाते श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं के साथ पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया।इस अवसर पर कटरा आलू मंडी बरवारी के पंडाल समिति के अध्यक्ष सुधीर कुमार जायसवाल ने बताया कि आदिमानव के जीवन काल पर आधारित पंडाल की थीम्स एक अनोखा और आकर्षक विचार था जो दर्शकों को एक अलग दुनिया में ले जाने में मदद कर सकता है। जो आदिमानव के जीवन शैली उनकी संस्कृति और उनके प्राकृतिक परिवेश को दर्शाता है। दुर्गा पंडाल में प्राकृतिक तत्वों जैसे कि पेड़,पत्थर और जल स्रोतों को शामिल किया गया था। आदिमानव के आश्रयों और घरों को दर्शाने के लिए प्राकृतिक सामग्री जैसे की लकड़ी, पत्ते और मिट्टी का उपयोग किया गया था। आदिमानव के शिकार और संग्रह के तरीकों को दर्शाने के लिए मूर्तियां और प्रदर्शनियों का उपयोग किया गया था। आदिमानव द्वारा उपयोग किए जाने वाले औजारों जैसे कि पत्थर के औजार लकड़ी आदि के औजारों को प्रदर्शित किया गया था। इस दुर्गा पंडाल में महिलाओं ने सिंदूर खेलने की रस्म को भी पूरा किया। महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं। विसर्जन के दौरान भक्तों ने खूब अबीर गुलाल उड़ाया, इस मौके पर मां की आरती व जयकारे गूंजते रहे।






