
लालगंज(रायबरेली)। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में कर्मयोगी संत शिरोमणि संत रविदास जी की 630वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के वंदना स्थल पर मां सरस्वती जी की प्रतिमा एवं संत रविदास जी के चित्र पर पुष्पार्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा हुआ, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा।
मां सरस्वती की पूजा-अर्चना में विद्यालय के प्रबंधक कैलाश बाजपेई, कोषाध्यक्ष कौशलेंद्र प्रताप ‘कंचन’ तथा प्रधानाचार्य सुरेश कुमार पाठक सहित विद्यालय परिवार के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभा को संबोधित करते हुए प्रबंधक कैलाश बाजपेई ने संत रविदास जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग सिद्धांत को अपने जीवन में उतारते हुए समाज को समरसता, समानता और भक्ति का अमूल्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने और मानवता को सर्वोपरि रखने का मार्ग दिखाया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने उनके गुरु स्वामी रामानंद जी के मार्गदर्शन का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर वरिष्ठ आचार्य अशोक कुमार यादव एवं रमेश मिश्र ने भी अपने प्रेरक विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को संत रविदास जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की सफलता में राम नारायण सिंह, रमेश बाजपेई, सुरेश वर्मा, दिवाकर सिंह, लक्ष्मी विश्वकर्मा, शालिनी मिश्रा, आर्या श्रीवास्तव, शिवांकरी तिवारी तथा शिवांगी विश्वकर्मा सहित अन्य शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कक्षा पंचम की छात्रा दिव्यांशी सूर्यवंशी ने आत्मविश्वास के साथ किया। अंत में प्रधानाचार्य सुरेश कुमार पाठक ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा का प्रेरणादायक अवसर सिद्ध हुआ।






