राजदेव द्विवेदी

प्रयागराज।सिविल लाइंस इलाके में प्रतिष्ठित पत्रकार एल.एन. सिंह की हत्या ने पूरे प्रयागराज को झकझोर कर रख दिया है। लगातार 20 से 25 बार चाकू से वार कर हमलावरों ने बर्बरता की हदें पार कर दीं। यह घटना अपराधियों के बढ़ते हौसलों और कानून-व्यवस्था की खस्ता हालत को उजागर करती है।
पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल
पत्रकार एल.एन. सिंह की हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पत्रकारों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। इससे पहले विजय कुमार मिश्रा और उनके परिवार को धमकियाँ मिलने के बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी रही। वहीं, पिंटू सिंह की हत्या और रीवेंद्र सिंह उर्फ रवी सिंह व राजुल शर्मा के साथ दमनकारी रवैये ने पत्रकारों को असुरक्षा के साये में जीने पर मजबूर कर दिया है।
अपराधियों के हौसले बुलंद
हाल के दिनों में दलित युवक रवींद्र कुमार की हत्या और अब पत्रकार एल.एन. सिंह की नृशंस हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं है। जब समाज की आवाज़ उठाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की कल्पना करना बेमानी हो जाता है।

प्रशासन से प्रमुख माँगें

  1. हत्यारों की गिरफ्तारी और कठोर सजा: पत्रकार एल.एन. सिंह के हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार कर उन्हें कठोरतम सजा दी जाए।
  2. पत्रकार सुरक्षा प्रोटोकॉल: पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय और हेल्पलाइन लागू की जाए।
  3. पुलिस की जवाबदेही तय हो: बढ़ते अपराधों और पत्रकारों के खिलाफ दमनकारी रवैये पर पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और आला अधिकारियों पर होगी।

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