
बनारस। बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक बनारस में आयोजित की गई, जिसमें देश भर के प्राथमिक शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस बैठक का मुख्य एजेंडा 24 नवंबर को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में होने वाले विशाल आंदोलन की रणनीति तय करना रहा, जिसमें टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में शिक्षकों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष एवं शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ महेंद्र यादव ने की। उन्होंने कहा कि टीईटी अनिवार्यता विशेष रूप से उन शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है, जो 2011 से पूर्व नियमित प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे और वर्षों से ईमानदारी व निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरटीई (Right to Education) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इस नियम को थोपना न्यायिक सिद्धांतों के भी विरुद्ध है, क्योंकि कोई भी कानून लागू होने की तारीख से आगे प्रभावी माना जाता है, न कि पिछली नियुक्तियों पर लागू किया जा सकता है।राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ महेंद्र यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “शिक्षक संघर्ष मोर्चा किसी भी कीमत पर इस काले कानून को लागू नहीं होने देगा।” उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ विरोध का प्रतीक नहीं है, बल्कि सरकार तक यह मजबूत संदेश पहुंचाने का माध्यम भी है कि शिक्षकों के अधिकार और सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को शिक्षकों के हित में संशोधित अध्यादेश जारी करते हुए टीईटी अनिवार्यता को तत्काल वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन और भी व्यापक व उग्र रूप धारण करेगा। अंत में सभी पदाधिकारियों और शिक्षकों ने 24 नवंबर को जंतर-मंतर पर ऐतिहासिक शक्ति-प्रदर्शन करने का संकल्प लिया और कहा कि यह आंदोलन शिक्षकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होगा।






