रमजान शुरू होते ही बच्चों में दिखा उत्साह, पहला रोजा रखकर मांगीं तरक्की और खुशहाली की दुआ

मुम्बई। पवित्र माह रमजान के आगाज के साथ ही लोगों की दिनचर्या बदल गई है। रातभर इबादत के बाद तड़के सहरी और नमाज अदा कर रोजेदार आराम करते नजर आए। वहीं कारोबार और दुकानदारी भी देरी से शुरू हुई। घरों में माहौल बदला हुआ दिखा, जहां दोपहर तक किचन बंद रहे, लेकिन इसके बाद इफ्तार की तैयारियां जोरों पर रहीं। महिलाओं ने तरह-तरह के व्यंजन तैयार किए, वहीं रविवार को पहला रोजा रखने वाले बच्चों की रोजा कुशाई की गई, जिससे बच्चे बेहद खुश नजर आए।रमजान के इस पाक महीने के पहले दिन में घरों से लेकर मस्जिदों तक इबादत का दौर जारी है। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पूरे जोश के साथ रमजान की बरकतें समेटने में लगे हुए दिखाई दिये। वहीं दोपहर बाद बाजारों में चहल- पहल बढ़ गई। सहरी और इफ्तार के सामान की जमकर खरीदारी हुई। खासतौर पर सिंवई, ईरानी खजूर फल और पापड़ की दुकानों पर भीड़ उमड़ी। पुराने शहर के मोहल्ला कोट, शेख सराय, मिरदही टोला और कजियारा इलाकों में रौनक देखने मिली। दुकानदारों के मुताबिक, देशी घी वाले लच्छे और ईरानी खजूर की मांग सबसे अधिक रही।
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सिद्रा बानो ने 6 साल की उम्र में रखा पहला रोज़ा
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मुम्बई वासी निवासी मिनहाज उद्दीन की बेटी सिद्रा बानो ने 6 साल की उम्र में पहला रोज़ा रखकर सबका दिल जीत लिया है। सिद्रा ने सिर्फ रोज़ा रख रही है बल्कि वो नमाज़ और तिलावत में भी मसरूफ रहती है। सिद्रा ने बताया कि सहरी के वक्त उठना बहुत अच्छा लगा। मम्मी ने हमें जगाया और स्वादिष्ट पकवान बनाए। नमाज पढ़ने के बाद मुल्क में अमन-शांति की दुआ मांगी। लोगों ने सिद्रा को मुबारकबाद पेश करते हुए शुभकामनाएं भेंट किया है। सिद्रा बानो प्रयागराज जनपद के मऊआइमा निवासी एवम राष्ट्रीय हिंदी दैनिक विद्रोही सामना के संपादक अलीम उद्दीन की भांजी हैं।

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