
महिलाओं को ईदगाह मस्जिदों में नमाज अदा करने से मत रोको===मौलाना उबैद उल्ला सलफी
मऊआइमा के मस्जिद , ईदगाह में महिलाएं आज भी नमाज अदा करती हैं
उबैद अंसारी
मऊआइमा। मऊआइमा के मोहल्ला कोट की मस्जिदों में कई दशकों से महिलाएं जुमा और तरावीह की नमाज अदा करती चली आ रही है।इस बाबत उमर बिन खतताब बादीपुर मस्जिद के पेश इमाम मौलाना उबैद उल्ला सलफी हदीस के हवाले से कहते हैं कि( बुखारी जिल्द एक पेज 273 हदीश नम्बर तीन) में है कि हजरज अब्दुल्ला बिन उमर की रवायत है कि अल्लाह के पाक रसूल ने फ़रमाया है कि जब तुम्हारी पत्नियां रात में मस्जिद में जाने के लिए इजाजत मांगें तो तुम इजाजत दे दो। मौलाना उबैद उल्ला सलफी ने कहा कि (हिंदा बिन हारिश से रवायत है)कि (उम्मे सलमा ) जो पाक रसूल की बीबी हैं,कहती हैं कि रसूल पाक जब फर्ज नमाज अदा करते थे । (नमाज खत्म)और सलाम के बाद पीछे नमाज अदा कर चुकी महिलाएं तुरन्त उठ कर घर चली जाती थी।यह हदीस (सही बुखारी जिल्द एक पेज 119 )से लिया गया है। मौलाना उबैद उल्ला सलफी कहते हैं कि औरतें जुमा और तरावीह की नमाज जमात के साथ सादगी से बिना किसी तरह के (खुशबू श्रृंगार)के नमाज अदा कर सकती हैं। मौलाना ने बताया कि (हजरत अब्दुल्ला बिन उमर) से रवायत है कि औरतों को ईदगाह,जुमा की नमाज, तरावीह आदि नमाज में वह जाना चाहें तो मत रोको। मौलाना उबैद उल्ला सलफी ने अनेकों हदीस के हवाले से महिलाएं को नमाज अदा करने के लिए ईदगाह, मस्जिद में नमाज अदा करने की बात करते हैं। मौलाना उबैद उल्ला सलफी ने ( बुखारी 900) के हवाले से कहते हैं कि पाक रसूल ने फ़रमाया कि औरतों के लिए अफजल उनका घर है बेहतर है कि वह घरों में नमाज अदा करें। मऊआइमा के मोहल्ला कोट में दशकों से मस्जिदों और ईदगाह में जुमा,तरावीह,ईद, बक़रीद,की नमाज अदा करती चली आ रही है। मस्जिद में महिलाओं के लिए छत पर कमरा (हाल)नमाज पढ़ने के लिए अलग से सीढी बनी हुई है ।इसी प्रकार ईदगाह में बाकायदा पर्दा का इंतजाम रहता है।

