मुंबई। मूर्तिकला की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रसाद करंबत ने संवाददाता हामिद इब्राहिम से खास बातचीत में अपनी कला-यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों के अनुभव साझा किए।

इंटरव्यू के दौरान करंबत ने बताया कि बचपन से ही उन्हें कला में गहरी रुचि थी और धीरे-धीरे मूर्तिकला उनका जुनून बन गई। अपनी पहली मूर्ति को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक अहम मोड़ साबित हुई और इसी से आत्मविश्वास मिला।

हामिद इब्राहिम से बातचीत में करंबत ने मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा – “मूर्तिकला केवल पत्थर या धातु को आकार देना नहीं है, बल्कि उसमें भावनाएँ और जीवन डालना होता है।”

अपने संघर्षों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर आसान नहीं रहा, लेकिन समाज और परिवार से धीरे-धीरे सहयोग मिलने लगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि धैर्य और मेहनत से ही सफलता मिलती है।

भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने बताया कि वे ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहते हैं, जिनसे समाज में सकारात्मक संदेश जाए और कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सके।

इस खास इंटरव्यू को दर्शकों ने खूब सराहा और प्रसाद करंबत की कला को लेकर लोगों में गहरी जिज्ञासा देखने को मिली।

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