
ग्राम चौपाल में नदारत रहे अधिकारी,पंचायत सचिवालय में लटका मिला ताला
विद्रोही सामना संवाददाता
प्रयागराज। गांव में ग्राम चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कराने के अफसरों के दावे शुक्रवार को पड़ताल के दौरान हवा हवाई दिखे। गांव की समस्या को गांव में निस्तारण के लिए शासन ने ग्राम चौपाल आयोजन करने का आदेश और निर्देश दे रखा है। ग्राम चौपाल एक ऐसा मंच है जहां सरकारी अधिकारी ग्रामीणों के साथ सीधे संवाद करते हैं, उनकी समस्याओं को सुनते हैं, और उनका समाधान करने का प्रयास करते हैं। यह पहल सरकार और जनता के बीच एक सेतु का काम करती है। बता दें कि जनपद के यमुनानगर विकासखंड शंकरगढ़ क्षेत्र में आयोजित ग्राम चौपाल में अधिकारियों की अनुपस्थिति ने एक बार फिर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की पोल खोल दी है। बता दें कि गोंइसरा ग्राम पंचायत में तैनात रहे सचिव गौरी शंकर का हाल ही में तबादला होने की वजह से अभी तक नवीन सचिव की तैनाती नहीं हो सकी है। शुक्रवार को आयोजित इस ग्राम चौपाल की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग के जेई एमआई कृष्ण कुमार को दी गई थी, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामवासियों में आक्रोश है।
मामले की हकीकत
मीडिया टीम ने जब गोइसरा पंचायत सचिवालय का दौरा किया, तो वहां के पंचायत भवन का नजारा देखकर हैरानी हुई। 10 बजे से 02 बजे तक आयोजित होने वाले ग्राम चौपाल में 11:31 बजे तक भी पंचायत भवन का ताला बंद था, जिससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितने गंभीर हैं।
जेई एमआई कृष्ण कुमार का बयान
जब इस विषय पर जेई एमआई कृष्ण कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उनके कार्य क्षेत्र से हटकर उन्हें ग्राम चौपाल में ड्यूटी दे दी गई है, जबकि वहीं विकासखंड में पहले से कई सचिव मौजूद हैं। आगे उन्होंने कहा कि फिर भी वह जाकर अपना फोटो खिंचाने का कोरम पूरा कर लेते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर कितने गंभीर हैं और उनका फोकस सिर्फ कागजी कार्रवाई पर है। सूत्रों की माने तो जेई एमआई कृष्ण कुमार पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उन पर ब्लास्टिंग कूप में भी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगता रहा है। इससे पहले भी शंकरगढ़ में भ्रष्टाचार की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। अब सवाल यह उठता है कि खंड विकास अधिकारी के निर्देशों के बाद भी ऐसे भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर क्यों नहीं दिख रहा असर? आखिर साफ-सुथरी और तेजतर्रार खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार के निर्देशों के बाद भी क्यों नहीं हो रही कार्रवाई? इससे साफ जाहिर होता है कि खंड विकास अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अब देखना यह होगा कि शंकरगढ़ विकासखंड क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और क्या ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि क्षेत्र के विकास के लिए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है।






