आर.के. त्रिपाठी
प्रयागराज। लंबे समय से मऊआइमा क्षेत्र की विवादित शत्रु संपत्ति पर चल रहे अवैध कब्जे और फर्जीवाड़े के खिलाफ आखिरकार प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। विद्रोही सामना की मुहिम और जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद सोरांव तहसील प्रशासन ने गाटा संख्या 3586, 4920 और 4922 से संबंधित जमीन की व्यापक जांच शुरू कर दी है।
सोमवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सोरांव राजस्व विभाग और पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे और विवादित भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब भूमाफियाओं पर शिकंजा कसना तय है और इस बहुचर्चित विवाद का समाधान निकलेगा।

◼️ जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत

प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर सबसे पहले भूमि पर कब्जे की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया कि इस जमीन से जुड़ी सभी रजिस्ट्री, इकरारनामे और राजस्व अभिलेख तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। फर्जी कागजातों के आधार पर कब और कैसे कब्जे दिए गए, इसकी पूरी तहकीकात शुरू हो चुकी है। गौरतलब है कि यह जमीन पहले से ही विवादों में रही है। स्थानीय स्तर पर कई बार झगड़े और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अपनाया है।

◼️ लेखपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल

जांच का सबसे संवेदनशील पहलू मौजूदा लेखपाल की भूमिका बताई जा रही है। ग्रामीणों और अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 2022 में ही यह जमीन शत्रु संपत्ति घोषित हो चुकी थी। बावजूद इसके, अलग-अलग लोगों को “वंशज” दिखाकर मालिकाना हक सौंप दिया गया।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि लेखपाल द्वारा तैयार की गई आख्या रिपोर्टों पर ही फर्जी नाम दर्ज हुए हैं। अब उनसे जवाब-तलब की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि यदि दोष साबित हुआ तो न केवल निलंबन बल्कि मुकदमा दर्ज होने की भी पूरी संभावना है।

◼️ पुलिस-प्रशासन की संयुक्त रणनीति

जमीन को लेकर लगातार हो रहे विवादों को देखते हुए पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने साफ निर्देश दिया है कि यदि विवादित जमीन पर दोबारा कोई निर्माण कार्य या प्लॉटिंग की कोशिश होती है तो तत्काल रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। स्थानीय थाना प्रभारी को हिदायत दी गई है कि जमीन पर चौकसी बढ़ाई जाए और किसी भी सूरत में भूमाफियाओं को संरक्षण न मिले।

◼️ 50 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन

करीब 36 बिस्वा की यह विवादित शत्रु संपत्ति मौजूदा बाजार भाव से लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की मानी जा रही है। यही वजह है कि भूमाफियाओं की निगाह इस पर लगातार टिकी रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करके कब्ज़ा जमाने और बेचने की कोशिशें लंबे समय से चल रही थीं। अब प्रशासन की सख्ती से अवैध धंधेबाजों की कमर टूटने की उम्मीद है।

◼️ फर्जी दस्तावेजों की होगी कानूनी जांच

प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि अगला कदम इस जमीन से जुड़ी सभी रजिस्ट्री की कानूनी जांच करना है। यदि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नाम दर्ज कराए गए हैं तो संबंधित लोगों और उन्हें संरक्षण देने वाले राजस्व कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। जिलाधिकारी का कहना है कि “शत्रु संपत्ति पर किसी भी हाल में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

◼️ प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों में जगी उम्मीद

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चल रहे विवाद के कारण उन्हें बार-बार असुरक्षा और तनाव झेलना पड़ रहा था। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। अब जिलाधिकारी के हस्तक्षेप और तहसील प्रशासन की सख्ती से लोगों में उम्मीद जगी है कि भूमाफियाओं का खेल खत्म होगा और जमीन सुरक्षित रहेगी।

◼️ विद्रोही सामना की मुहिम का असर

विद्रोही सामना ने इस मुद्दे को लगातार उठाया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई शुरू की। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि मीडिया की भूमिका और जनदबाव ने इस कार्रवाई को तेज करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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